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#4 |
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Now playing
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Can't see them DR.
Anyway that reminded me of the days when Hasya Kavi Sammelan would come on Doordarshan and many a kavis like Ashok Chakrdhar, Shail Chaturvedi, Kaka Hathrasi, Surendra Sharma were pretty popular. Atleast a couple of these I remember still(after a decade and a half!) Yeh pata nahin kiska hai, naam bhool gaya. Mulahija farmaiye. हमारा टेलीफोन है कितना महान एक नमूना देखिये श्रीमान हमने लगाया रेलवे enquiry लग गया कब्रिस्तान हुआ यूं के हमें कहीं जाना था सो गाड़ी में आरक्षण करवाना था सोच के हमने रेलवे का नम्बर लगाया हमें क्या मालून उधर कब्रिस्तान के बाबु ने उठाया हमने कहा - एक बर्थ चाहिए, मिल जायेगी? बैठे ही आपके लिए हैं, हमारी सेवा कब काम आएगी? हमारा होते बिलकूल न घबराइये एक क्या दस बर्थ खाली हैं, पूरे खानदान को ले आइये! |
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ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना जहाँ प्यार देखो वहाँ घर बनाना
ये दिल कि ईमारत बनती है दिल से दिलाशों को छु के उम्मीदों से मिल के जहाँ पे बसेरा हो..... -- गुलज़ार |
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#5 |
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Aashiq logon ke liye hai .. mast kavita.. lurker mian u will appreciate this one |
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#7 |
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प्रेम ऐसा विषय है जिस पर हिन्दुस्तान में सिर्फ़ थेओरी की क्लास चलती है
![]() वर्षों प्यार पर लिखने के बाद अगर प्यार कराने चलें तो क्या होता है भ्रवर कोई कुमुदिनी पर मचल बैठा तो हंगामा | हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा || अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का | मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा || |
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#9 |
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The Legend
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#10 |
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The Legend
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#11 |
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ॐ तत् सत्
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How did I miss this thread!!
Lurker guru, Kaka hathrasi se yaad aaya, unki famous kavita Police-mahima: पुलिस-महिमा पड़ा - पड़ा क्या कर रहा , रे मूरख नादान दर्पण रख कर सामने , निज स्वरूप पहचान निज स्वरूप पह्चान , नुमाइश मेले वाले झुक - झुक करें सलाम , खोमचे - ठेले वाले कहँ ‘ काका ' कवि , सब्ज़ी - मेवा और इमरती चरना चाहे मुफ़्त , पुलिस में हो जा भरती कोतवाल बन जाये तो , हो जाये कल्यान मानव की तो क्या चले , डर जाये भगवान डर जाये भगवान , बनाओ मूँछे ऐसीं इँठी हुईं , जनरल अयूब रखते हैं जैसीं कहँ ‘ काका ', जिस समय करोगे धारण वर्दी ख़ुद आ जाये ऐंठ - अकड़ - सख़्ती - बेदर्दी शान - मान - व्यक्तित्व का करना चाहो विकास गाली देने का करो , नित नियमित अभ्यास नित नियमित अभ्यास , कंठ को कड़क बनाओ बेगुनाह को चोर , चोर को शाह बताओ ‘ काका ', सीखो रंग - ढंग पीने - खाने के ‘ रिश्वत लेना पाप ' लिखा बाहर थाने के |
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#12 |
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The Legend
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Boy , I am struggling to read Devanagiri script .. lost touch with it.
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#13 |
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Now playing
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Kaka Haathrasi was superb. Dekh ke saala sanki-tharki budhao lagta tha(said respectfully). A hindi Khuswant Singh if you will.One of the poets I remember was Surendra Sharma. Hilarious! He would speak with a Haryanvi accent with a deadpan face. As in - Maari ghaadadi(wife) bolyo... ![]() |
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ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना जहाँ प्यार देखो वहाँ घर बनाना
ये दिल कि ईमारत बनती है दिल से दिलाशों को छु के उम्मीदों से मिल के जहाँ पे बसेरा हो..... -- गुलज़ार |
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#14 |
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The Legend
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#15 |
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ॐ तत् सत्
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2-3 years back, during Holi festival time I attended one hasya kavi sammelan at Andheri sports complex...
This one from Pradeep Chaube tickled me: तुम एम.ए. फ़ास्ट डिवीज़न हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, तुम फ़ौजी अफ़सर की बेटी, मैं तो किसान का बेटा हूँ, तुम राबड़ी खीर मलाई हो, मैं तो सत्तू साप्रेता हूँ, तुम एसी घर में रहती हो, मैं पेड़ के नीचे लेता हूँ, तुम नई मारुति लगती हो, मैं स्कूटर लमरेता हूँ, इस कदर अगर हम चुप-चुप कर आपस मे प्रेम बढ़ाएँगे, तो एक रोज़ तेरे डॅडी अमरीश पूरी बन जाएँगे, सब हड्डी पसली तोड़ मुझे भिजवा देंगे वो ज़ैल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, तुम अरब देश की घोड़ी हो, मैं हूँ गदहे की नाल प्रिए, तुम दीवाली का बोनस हो, मैं भूखो की हड़ताल प्रिए, तुम हीरे जड़ी तश्तारी हो, मैं अल्मुनियम का थाल प्रिए, तुम चिकन-सूप बीरयानी हो, मैं कंकड़ वाली दाल प्रिए, ![]() तुम हिरण-चाओकाड़ी भारती हो, मैं हूँ कछुए की चाल प्रिए, तुम चंदन-वॅन की लकड़ी हो, मैं हूँ बबूल की छाल प्रिए, मैं पाके आम सा लटका हूँ, मत मारो मुझे गुलेल प्रिए, ![]() ![]() मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, मैं शनि-देव जैसा कुरूप, तुम कोमल काँचन काया हो, मैं तन-से मन-से कांशी राम, तुम महा चंचला माया हो, तुम निर्मल पावन गंगा हो, मैं जलता हुआ पतंगा हूँ, तुम राज घाट का शांति मार्च, मैं हिंदू-मुस्लिम दंगा हूँ, ![]() तुम हो पूनम का ताजमहल, मैं काली गुफ़ा जनता की, तुम हो वरदान विधाता का, मैं ग़लती हूँ भगवांता की, तुम जेट विमान की शोभा हो, मैं बस की तेलम-तेल प्रिए, ![]() मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मैं पत्थर का सिलबत्ता हूँ, तुम ए.के.-सैंतालीस जैसी, मैं तो इक देसी काटता हूँ, तुम चतुर राबड़ी देवी सी, मैं भोला-भला लालू हूँ, तुम मुक्त शेरनी जंगल की, मैं चिड़ियाघर का भालू हूँ, तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी, मैं वी.पी.सिन्घ सा ख़ाली हूँ, ![]() ![]() तुम हँसी माधुरी दीक्षित की, मैं पोलीस्मॅन की गाली हूँ, कल जेल अगर हो जाए तो दिलवा देना तुम बेल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, मैं ढाबे के ढाँचे जैसा, तुम पाँच सितारा होटेल हो, मैं माहुए का देसी ठर्रा, तुम रेड-लेबल की बोटेल हो, ![]() तुम चित्रा-हार का मधुर गीत, मैं कृषि-दर्शन की झाड़ी हूँ, तुम विश्वा-सुंदरी सी कमाल, मैं ठेलिय छाप कबाड़ी हूँ, तुम सोनी का मोबाइल हो, मैं टेलिफोन वाला चोँगा, तुम मछली मानसरोवर की, मैं सागर तट का हूँ घॉंघा, दुस मंज़िल से गिर जाऊगा, मत आगे मुझे धकेल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, तुम सत्ता की महारानी हो, मैं विपक्षा की लाचारी हूँ, तुम हो ममता-ज़ैललिता सी, मैं क्वारा अटल-बिहारी हूँ, तुम तेंदुलकर का शतक प्रिए, मैं फॉलो ओं की पारी हूँ, तुम गेट्ज़, मातिज़, करॉला हो मैं लेयलेंड की लॉरी हूँ, ![]() मुझको रेफ़री ही रेहने दो, मत खेलो मुझसे खेल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए, मैं सोच रहा की रहे हैं क़ब्से, श्रोता मुझको झेल प्रिए, मुश्किल है अपना मेल प्रिए, ये प्यार नहीं है खेल प्रिए. |
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#16 |
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hilarious Sandy boss. Thanks for sharing Pradeep Chaube naam suna suna sa lag reha hai.
He was the best
I beleive her poems used to appear in Hindi monthly Kadambini. |
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ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना जहाँ प्यार देखो वहाँ घर बनाना
ये दिल कि ईमारत बनती है दिल से दिलाशों को छु के उम्मीदों से मिल के जहाँ पे बसेरा हो..... -- गुलज़ार |
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#18 |
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You will find chaube ji performing this one on rajshri.com in humour section
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#19 |
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Surendra Sharma
Maine Ghadari se bola tujhe ramayan ke is dohe ka matlab pata hai: "Dhol ganwar shudra pashu nari shakal tadna ke adhikari" Ghadari boli: Azi iska matlab to biklul saaf hai ismien ak jagah main hun char jagah aap hai.. |
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#20 |
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Hahaha..Yes yes I definitely remember this one. Man I havent heard many of these guys in years! How time flies
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ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना जहाँ प्यार देखो वहाँ घर बनाना
ये दिल कि ईमारत बनती है दिल से दिलाशों को छु के उम्मीदों से मिल के जहाँ पे बसेरा हो..... -- गुलज़ार |
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ye lo urdu hasya from pakistan Khalid masood
कोई नहीं है खालिद-ए-मसूद की तरह | उसकी ग़ज़ल का ज़ायका अमरुद की तरह || उसका रिश्ता न होने का बायस उसका अब्बा था | सब हैरान थे उसने ऐसा अब्बा कहाँ से लब्बा था || ![]() |
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#22 |
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हब्बा की बेटियाँ भी सुनें मेरी बात को |
मुमकिन नहीं की पाल सकें पाँच सात को | जन भी लिए तो रोयेंगे वो सभी दाल भात को | तरकीब इस लिए ये सुनें , जब भी रात को देखें बुरी नज़र से मियां आपकी तरफ़ सो जायें आप फेर के मुहं दूसरी तरफ अच्छा है; जो हो बीबी और सौहर में तालमेल लेकिन न इस कदर की हो बच्चों की रेलपेल हर साल नौनिहाल की डालो न दाग बेल व आख़िर अगर हो वक्त तो खेलो कुछ और खेल इस बात पर किया है कभी तुमने गौर भी मर्दानगी दिखाने के मैंदान हैं और भी || ![]() |
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FYI FLAMY has a Girl friend
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