dnmaru Posted April 3, 2011 Author Posted April 3, 2011 भारत की विश्वकप विजय पर मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने अनुभूति है चरमानंद की कस्तूरी सुगंध की क्यूँ कि बदले हैं हकीकत में बहुत प्रतीक्षित सुखद सपने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने धोनी की सेना फिर गरजी दुश्मन पर बिजली बन बरजी चकोर देश को विश्वकप चंदा मिला है तृषित बालक मन पय पान कर खिला है पूरा देश मोर बन नाचे, क्योंकि वर्षों की अतृप्त क्षुधा को मिली अचानक सुधा चखने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने अद्भुत विजय का क्या कहूँ मैं उल्लास का क्या कहूँ मैं खुशी है सब कंही, हर तरफ जश्न है आँखों में अश्रु है पर क्या सुकून है लंबे सफर के थकित पथिक को मिली है छाँव मिला किनारा जब थपेड़ों में फँसी हो नाँव विश्व सजग हो जाओ अब, लगा भारत सूर्य दमकने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने
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