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भारत की विश्वकप विजय पर मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने अनुभूति है चरमानंद की कस्तूरी सुगंध की क्यूँ कि बदले हैं हकीकत में बहुत प्रतीक्षित सुखद सपने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने धोनी की सेना फिर गरजी दुश्मन पर बिजली बन बरजी चकोर देश को विश्वकप चंदा मिला है तृषित बालक मन पय पान कर खिला है पूरा देश मोर बन नाचे, क्योंकि वर्षों की अतृप्त क्षुधा को मिली अचानक सुधा चखने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने अद्भुत विजय का क्या कहूँ मैं उल्लास का क्या कहूँ मैं खुशी है सब कंही, हर तरफ जश्न है आँखों में अश्रु है पर क्या सुकून है लंबे सफर के थकित पथिक को मिली है छाँव मिला किनारा जब थपेड़ों में फँसी हो नाँव विश्व सजग हो जाओ अब, लगा भारत सूर्य दमकने मैं कंहू उद्गार अपने मैं कंहू कुछ भाव अपने

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