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लेकिन नियरे तो वाकई खडी बोली का शब्द है. आपने वह दोहा नही पढ़ा है, कबीर का: "निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाये बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाये
नही, यह खड़ी बोली का शब्द नहीं है. और दोहा भी खड़ी बोली में नहीं है. खड़ी बोली में आपके पास अनेको शब्द है जैसे -- निकट, समीप, पास, नजदीक, क़रीब (उर्दू) इत्यादि . वास्तव मे यदि देखा जाय तो भक्तिकाल के अधिकतर कवि जैसे कबीरदास, सूरदास, रहीम तथा गोस्वामी तुलसीदास के जितने भी दोहे हैं उनमें से अधिकतर खड़ी बोली में नहीं है. वे सब के सब उस वक्त की ग्रामीण भाषाओं जैसे अवधी, मैथिलि, भोजपुरी इत्यादि में लिखते थे. यह दोहा जो आपने लिखा है यह भी उनमें से एक है.
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नही' date= यह खड़ी बोली का शब्द नहीं है. और दोहा भी खड़ी बोली में नहीं है. खड़ी बोली में आपके पास अनेको शब्द है जैसे -- निकट, समीप, पास, नजदीक, क़रीब (उर्दू) इत्यादि . वास्तव मे यदि देखा जाय तो भक्तिकाल के अधिकतर कवि जैसे कबीरदास, सूरदास, रहीम तथा गोस्वामी तुलसीदास के जितने भी दोहे हैं उनमें से अधिकतर खड़ी बोली में नहीं है. वे सब के सब उस वक्त की ग्रामीण भाषाओं जैसे अवधी, मैथिलि, भोजपुरी इत्यादि में लिखते थे. यह दोहा जो आपने लिखा है यह भी उनमें से एक है.
आरम्भ में मुझे भी यही लगा था की उक्त दोहा अवधी में है. किंतु गूगल के परीक्षण के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुँची कि यह दोहा खड़ी बोली में ही है. ... और आपने मैथीली में कोई दोहा कहाँ पढ़ा? अगर आपको याद हो तो हमें भी सुनाइये.
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आरम्भ में मुझे भी यही लगा था की उक्त दोहा अवधी में है. किंतु गूगल के परीक्षण के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुँची कि यह दोहा खड़ी बोली में ही है..
वो कैसे? क्या गूगल द्वारा ये जाना जा सकता है के कौन सा शब्द अवधी/भोजपुरी है और कौन सा शब्द "खड़ी बोली"? मेरे विचार से वह दोहा खड़ी बोली मे नहीं है -- क्यूंकि उसमे निम्नलिखित अवधी/भोजपुरी शब्दो का प्रयोग किया गया है -- (१) छवाय (२) सुभाय (३) नियरे
... और आपने मैथीली में कोई दोहा कहाँ पढ़ा? अगर आपको याद हो तो हमें भी सुनाइये.
अहा !! कितना सुखद अनुभव होता अगर मुझे मैथिलि का भी ज्ञान होता.....किंतु मैं ठहरा उत्तर प्रदेश का- जहा पर अवधी का बोलबाला है.:sad_smile: यदि कोई बिहारी जो कि नेपाल के सीमावर्ती इलाके का मिले तोह कुछ मैथिलि दोहा, चौपाई या छन्द का रसपान किया जा सकता है. विद्यापति जैसे भाक्ति कवियों ने मैथिलि में बहुत ही रोमांचक काव्य लिखे है, और मैथिलि में लोकगीत, भक्तिगीत (पचरा) वगैरह अत्यन्त ही सुंदर है --- कोई बिहारी है यहाँ पर जो कुछ प्रकाश डाल सके इस विषय पर?? :regular_smile:
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वो कैसे? क्या गूगल द्वारा ये जाना जा सकता है के कौन सा शब्द अवधी/भोजपुरी है और कौन सा शब्द "खड़ी बोली"? मेरे विचार से वह दोहा खड़ी बोली मे नहीं है -- क्यूंकि उसमे निम्नलिखित अवधी/भोजपुरी शब्दो का प्रयोग किया गया है -- (१) छवाय (२) सुभाय (३) नियरे
गूगल में यह दोहा लिखें. आपको कई जानकारियां मेलेंगी.
अहा !! कितना सुखद अनुभव होता अगर मुझे मैथिलि का भी ज्ञान होता.....किंतु मैं ठहरा उत्तर प्रदेश का- जहा पर अवधी का बोलबाला है.:sad_smile: यदि कोई बिहारी जो कि नेपाल के सीमावर्ती इलाके का मिले तोह कुछ मैथिलि दोहा, चौपाई या छन्द का रसपान किया जा सकता है. विद्यापति जैसे भाक्ति कवियों ने मैथिलि में बहुत ही रोमांचक काव्य लिखे है, और मैथिलि में लोकगीत, भक्तिगीत (पचरा) वगैरह अत्यन्त ही सुंदर है --- कोई बिहारी है यहाँ पर जो कुछ प्रकाश डाल सके इस विषय पर?? :regular_smile:
बचपन में मुझे विद्यापति के ढेरों गीत याद थे किंतु अब भूल गयी हूँ. मैथिली में विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले गीत भी आते थे, पर अब याद नही. मैंने हरिमोहन झा की कहानियां भी पढी हैं. ICF पर क्यों छैथ जिनका मैथिली के ज्ञान होंईन ?
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यहाँ पर कांफी लोग जमा हुए है ! हो क्या रहा है यहाँ ! हम सोंच रहें थे के राष्ट्र भाषा मुझे भी बहुत बसंद है ! मात्रा प्रश्न यह उठता है के देव नागरी लिपि मैं लिखें हुए शब्द धुन्ड़ना बड़ा ही मुश्किल होगा ! खैर, हमें इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए ! इस उपलाभी के लिए सब को बधाई ! शुभ दिवस !!

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is thread se hum को पता चला की हमारी हिन्दी पड़ने और लिखने का skill बड़ा ख़राब हो गया है .

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वोट दा हेक यू राईटिंग होली? यार स्पेल्लिंग ढंग से लिख ना ताकि कुछ समाज में आए!

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यहाँ पर कांफी लोग जमा हुए है ! हो क्या रहा है यहाँ ! हम सोंच रहें थे के राष्ट्र भाषा मुझे भी बहुत बसंद है ! मात्रा प्रश्न यह उठता है के देव नागरी लिपि मैं लिखें हुए शब्द धुन्ड़ना बड़ा ही मुश्किल होगा ! खैर' date= हमें इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए ! इस उपलाभी के लिए सब को बधाई ! शुभ दिवस !!
लीजिये हम अपने वाणी मैं सुधार लातें हुए, आपको उसका पूर्ण हिन्दी अनुवाद लिख भेजते है ! यहाँ पर बहुत मात्रा मैं लोग एकत्रित हुए है !! हो क्या रहा है यहाँ !! हम सोंच रहें थे के राष्ट्र भाषा तो हमें भी बहोत अच्छी लगती है किंतु प्रश्न यह उठता है के देव-नागरी मैं लिखे शब्दा को धुन्ड़ना बहुत ही कष्ट दाई होगा !! अतः हमें इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए !! प्रणाम !!
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:hysterical: :haha:... ई का होता हो ? सब जाना हिंदिये मे बतियाव्ता ... दोनी त आपन माथा पिटत होई (Trans: Whats happening here..? all are talking in Hindi.... Donny must be banging his head.. :haha:

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Gai, dont worry too much about your hindi reading skills. This google indic tool is not infallible. Infact, it is quite imprecise and it regularly mispells words. Sandest, for eg, has a very good grasp of Hindi grammar but his stuff is the hardest to read (IMO) because the spelling mistakes that google makes in transliterating devnagari script from the roman script makes his 'shuddh and arcaic' terminologies, which he uses liberally, 10 times harder to read. And even if your hindi reading skills are rusty, it is something you can keep sharpening by thinking your thoughts in hindi for a while and then reading a hindi online paper once or twice a week at most.

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Gai, dont worry too much about your hindi reading skills. This google indic tool is not infallible. Infact, it is quite imprecise and it regularly mispells words. Sandest, for eg, has a very good grasp of Hindi grammar but his stuff is the hardest to read (IMO) because the spelling mistakes that google makes in transliterating devnagari script from the roman script makes his 'shuddh and arcaic' terminologies, which he uses liberally, 10 times harder to read. And even if your hindi reading skills are rusty, it is something you can keep sharpening by thinking your thoughts in hindi for a while and then reading a hindi online paper once or twice a week at most.
Actually it spells them correctly. Try using IE and you'll see the difference. Firefox needs to have "Pango" enabled to show indic fonts correctly. If you're on linux, close all firefox windows, and open it using this on the command line:
MOZ_ENABLE_PANGO=1 firefox

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Actually it spells them correctly. Try using IE and you'll see the difference. Firefox needs to have "Pango" enabled to show indic fonts correctly. If you're on linux, close all firefox windows, and open it using this on the command line:
Me : :withstupid: Me to you : :hail::hail::hail::hail:
Guest dada_rocks
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ye suniye Kashi hile patana hile chhapara hile la .. ho tori lachake jab kamariya sara zilaha hile la.. mast gaya hai is pakistani bachche ne nf733DYaOeU&mode=related&search=

Guest dada_rocks
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ओवल पर क़ब्जा; भारत ने बर्तानिया को धूल चटाई | इस तरह के शीर्षक देखने को मिलेंगे कल्ह; और दूरदर्शन-वाले सचिन-सौरव को दिखा के ये दोस्ती हम नहीं तोरेंगे का गाना गा रहे हैं |

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